रचना चोरों की शामत

Thursday, 25 August 2016

नाम कृष्ण का

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए चित्र परिणाम
अंतर्घट की प्यास बुझाता, नाम कृष्ण का।
सदा मोक्ष का द्वार दिखाता, नाम कृष्ण का।

मानव-मन पर असुर दैत्य जब हावी होते
मलिन हृदय निर्मल कर जाता, नाम कृष्ण का।

भवसागर में जब नैया, हिचकोले खाती
बन पतवार, किनारे लाता, नाम कृष्ण का।

राह भटकता अन्तर्मन, आलोकित करके
गीता के संदेश सुनाता, नाम कृष्ण का।

निराकार है, पर देखें यदि, ध्यान लगाकर
सगुण ब्रह्म का बोध कराता, नाम कृष्ण का।

लाख बलाएँ, रोग, दोष, हों भू पर काबिज
हर बाधा को हर ले जाता, नाम कृष्ण का।

गोकुल-मथुरा मध्य उफनती, यमुना का जल
पुरा काल से याद दिलाता, नाम कृष्ण का।  

भादों में जब कृष्ण जन्म का, पर्व मनाते
भारत-भू पावन कर जाता, नाम कृष्ण का।

यूँ तो हैं भगवान कल्पनासभी बराबर
पर खुद से पहचान कराता, नाम कृष्ण का।   

-कल्पना रामानी

Friday, 19 August 2016

रक्षा-बंधन पर्व मनाने सावन आया


रसमय स्नेह-सुधा बरसाने, सावन आया 
रक्षाबंधन पर्व मनाने, सावन आया 

पीहर से पिय घर तक स्नेहिल-सेतु बनाकर 
बहनों का सम्मान बढ़ाने, सावन आया 

बोल रही रस घोल कान में, हवा बहन के
चलो मायके रंग जमाने, सावन आया 

अहं-तिमिर से आब खो चुके बुझे दिलों में 
पावनता की ज्योत जगाने, सावन आया 

झूम रहा हर पेड़, देख पाँतें झूलों की 
डाल-डाल पर पींग बढ़ाने, सावन आया 

मचल रही पग-हाथ रचाने, हिना, बहन के 
पायल-धुन पर गीत सुनाने, सावन आया 

राखी बँधी कलाई-कर से हम बहनों को 
नेह-नेग अधिकार दिलाने, सावन आया 

टूट रहे जो आज ‘कल्पना’ पावन रिश्ते 

उनमें फिर से गाँठ लगाने, सावन आया 


-कल्पना रामानी

Sunday, 14 August 2016

प्यारा अमर निशान

स्वतंत्रता की वर्षगाँठ है, शिखर-शिखर पर तान।
लहराएँगे आज  तिरंगा, पूर्ण मान सम्मान।

अगस्त पंद्रह सैंतालिस का दिन पावन था वो
मुक्त हुआ जब फिरंगियों से अपना हिंदुस्तान।   

ज्यों ही ले संदेश चल पड़ी,  सुरभित नवल हवा
पाखी भी वंदन को पहुँचे, तय कर अथक उड़ान।

करने को अभिषेक आ गए, उमड़-घुमड़ बदरा
कहीं बज उठे शंख-घंटियाँ, गूँजी कहीं अजान।

नन्हें बालक, नन्हें झंडे टाँगे वस्त्रों में
घूम रहे हैं लिए हाथ में, दोने भर मिष्ठान।

मैदानों में भी परेड के खूब नज़ारे हैं
कहीं ध्वनित है मधुर सुरों में, जन-गण-मन जय गान।

इस दिन वीर शहीदों को भी याद सभी करते
जो यौवन में हुए देश पर तन मन से कुर्बान।

अब ऐसे संकल्प प्रगति के, मिलकर सभी करें।   
बनी रहे ज्यों भारत-माँ  की सबसे ऊँची शान।  
   
रहे कल्पना सदा अखंडित आज़ादी प्यारी
युगों-युगों तक तना रहे, यह प्यारा अमर निशान। 

-कल्पना रामानी 

Thursday, 4 August 2016

आओगे ना!


दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना!
रूठी हूँ तो मुझे मनाने, आओगे ना!

रंग हुए बदरंग, नज़ारों के हैं सारे 
नव-रंगों के ले नज़राने, आओगे ना!

भूलीं नहीं ये गलियाँ अब तक, वो दीवानगी 
इन गलियों में फिर दीवाने, आओगे ना!

छोड़ गईं ख़ुशबुएँ खफा हो मन बगिया को
तुम सुगंध बन, मन महकाने, आओगे ना!

सहमा-सहमा समय खो चुका है गति अपनी
थमे पलों को गतिय बनाने, आओगे ना!

शेर मेरे सुन, रो दोगे तुम, मुझे पता है
जी भर हँसने और हँसाने, आओगे ना!

हक़ न रहा अब करूँ शिकायत तुमसे कोई
पर तुम तो अधिकार जताने, आओगे ना!

भूल कल्पनामानी अपनी, मैंने साथी! 
एक बार तो सज़ा सुनाने, आओगे ना! 

-कल्पना रामानी

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