रचना चोरों की शामत

Saturday, 26 September 2015

प्यारे फूल गुलाब के


स्वप्न गुलाबी हमें दिखातेप्यारे फूल गुलाब के
बागों के राजा कहलातेप्यारे फूल गुलाब के

रस-सुगंध, सौन्दर्य-स्वामी येहर लेते हर जन का मन
जब डालों पर खिल लहरातेप्यारे फूल गुलाब के

ऋतु बसंत में हरिक बाग तब, बन जाता है रंगमहल  
डाल-डाल पर जब लद जाते, प्यारे फूल गुलाब के

देख धूप के तेवर इनकारूप निखर जाता है और
सूरज से भी आँख मिलातेप्यारे फूल गुलाब के

हर मुश्किल को मीत बना लोदेते हमको सीख यही
काँटों से भी प्रीत निभातेप्यारे फूल गुलाब के

अलग-अलग ऋतु में आ मिलतेइनसे जब बिछड़े साथी
हँसकर उनको गले लगातेप्यारे फूल गुलाब के

थोड़ा सा दें स्थान 'कल्पना', इनको अपने आँगन में
रंग-सुरभि से घर महकाते, प्यारे फूल गुलाब के 

-कल्पना रामानी 

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (28-09-2015) को "बढ़ते पंडाल घटती श्रद्धा" (चर्चा अंक-2112) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
अनन्त चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Asha Saxena said...

बहुत सुन्दर भाव लिए रचना कल्पना जी |

समर्थक

मेरी मित्र मंडली

सम्मान पत्र

सम्मान पत्र