रचना चोरों की शामत

Thursday, 25 August 2016

नाम कृष्ण का

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के लिए चित्र परिणाम
अंतर्घट की प्यास बुझाता, नाम कृष्ण का।
सदा मोक्ष का द्वार दिखाता, नाम कृष्ण का।

मानव-मन पर असुर दैत्य जब हावी होते
मलिन हृदय निर्मल कर जाता, नाम कृष्ण का।

भवसागर में जब नैया, हिचकोले खाती
बन पतवार, किनारे लाता, नाम कृष्ण का।

राह भटकता अन्तर्मन, आलोकित करके
गीता के संदेश सुनाता, नाम कृष्ण का।

निराकार है, पर देखें यदि, ध्यान लगाकर
सगुण ब्रह्म का बोध कराता, नाम कृष्ण का।

लाख बलाएँ, रोग, दोष, हों भू पर काबिज
हर बाधा को हर ले जाता, नाम कृष्ण का।

गोकुल-मथुरा मध्य उफनती, यमुना का जल
पुरा काल से याद दिलाता, नाम कृष्ण का।  

भादों में जब कृष्ण जन्म का, पर्व मनाते
भारत-भू पावन कर जाता, नाम कृष्ण का।

यूँ तो हैं भगवान कल्पनासभी बराबर
पर खुद से पहचान कराता, नाम कृष्ण का।   

-कल्पना रामानी

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (27-08-2016) को "नाम कृष्ण का" (चर्चा अंक-2447) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kavita Rawat said...

बहुत सुन्दर रचना ..
नाम के महिमा अनंत होती है ... बस दिल से निकलनी चाहिए
जय श्रीकृष्ण !!

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